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पीएम मोदी के संबोधन की दस बड़ी बातें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा

पीएम मोदी ने कहा कि जैसे पहले एमएसपी दी जाती थी वैसे ही दी जाती रहेगी. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ये न कभी बंद होगी न कभी खत्म होगी. अगर किसानों को किसी तरह की आशंका है तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं.

भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि पहले जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दी जाती थी, वैसे ही दी जाती रहेगी. एमएसपी न बंद होगी, न खत्म होगी. पीएम मोदी का बयान तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन के बीच आया है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नए कृषि कानून रातों-रात नहीं आये हैं, बल्कि अलग-अलग दल, विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान लंबे समय से सुधारों की मांग कर रहे थे.

भोपाल में किसान सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कही.

पीएम मोदी के संबोधन की दस बड़ी बातें

पीएम मोदी ने कहा, ”मैं किसानों को भरोसा दिलाता हूं कि एमएसपी को खत्म नहीं किया जाएगा, यह जारी रहेगी, विपक्ष इस बारे में झूठ बोल रहा है.” उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें कृषि सुधारों से नहीं बल्कि ‘मोदी से दिक्कत’ है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों ने स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट वर्षों तक दबाए रखी; लेकिन हमने इसे किसानों के हित में इसे लागू किया. उन्होंने कहा कि अपने-अपने घोषणापत्रों में कृषि सुधारों के बारे में बात करने वाले राजनीतिक दलों से लोगों को जवाब मांगना चाहिए. उन्होंने विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ”कृषि सुधारों का श्रेय आप लेना चाहते हैं तो लें लेकिन किसानों को भ्रमित नहीं करें.”

पीएम मोदी ने पिछली सरकार और अपनी सरकार में अलग-अलग अनाज पर मिलने वाले एमएसपी का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय गेहूं पर एमएसपी 1400 रुपए प्रति क्विंटल थी. हमारी सरकार प्रति क्विंटल गेहूं पर 1975 रुपए एमएसपी दे रही है. पिछली सरकार के समय धान पर एमएसपी 1310 रुपए प्रति क्विंटल थी. हमारी सरकार प्रति क्विंटल धान पर करीब 1870 रुपए एमएसपी दे रही है. पिछली सरकार में ज्वार पर एमएसपी 1520 रुपए प्रति क्विंटल थी. हमारी सरकार ज्वार पर प्रति क्विंटल 2640 रुपए MSP दे रही है. पिछली सरकार के समय मसूर की दाल पर एमएसपी 2950 रुपए थी. हमारी सरकार प्रति क्विंटल मसूर दाल पर 5100 रुपए एमएसपी दे रही है. पिछली सरकार के समय चने पर एमएसपी 3100 रुपए थी. हमारी सरकार अब चने पर प्रति क्विंटल 5100 रुपए एमएसपी दे रही है. पिछली सरकार के समय तूर दाल पर एमएसपी 4300 रुपए प्रति क्विंटल थी. हमारी सरकार तूर दाल पर प्रति क्विंटल 6000 रुपए एमएसपी दे रही है. पिछली सरकार के समय मूंग दाल पर एमएसपी 4500 रुपए प्रति क्विंटल थी. हमारी सरकार मूंग दाल पर करीब 7200 रुपए एमएसपी दे रही है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये इस बात का सबूत है कि हमारी सरकार एमएसपी समय-समय पर बढ़ाने को कितनी तवज्जो देती है, कितनी गंभीरता से लेती है. एमएसपी बढ़ाने के साथ ही सरकार का जोर इस बात पर भी रहा है कि ज्यादा से ज्यादा अनाज की खरीदारी एमएसपी पर की जाए. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने अपने पांच साल में 56 लाख मिट्रिक टन से ज्यादा एमएसपी पर खरीदा है.

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यानि हमारी सरकार ने न सिर्फ एमएसपी में वृद्धि की, बल्कि ज्यादा मात्रा में किसानों से उनकी अपज को एमएसपी पर खरीदा है. इसका सबसे बड़ा लाभ ये हुआ है कि किसानों के खाते में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा पैसा पहुंचा है.

पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सरकार के पांच साल में किसानों को धान और गेहूं की एमएसपी पर खरीद के बदले 3 लाख 74 हजार करोड़ रुपए ही मिले थे. हमारी सरकार ने इतने ही साल में गेहूं और धान की खरीद करके किसानों को 8 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा दिए हैं.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2014 से पहले के 5 साल में पिछली सरकार ने सिर्फ डेढ़ लाख मीट्रिक टन दाल ही किसानों से खरीदी. जब साल 2014 में हमारी सरकार आई तो हमने नीति भी बदली और बड़े निर्णय भी लिए. हमारी सरकार ने किसानों से पहले की तुलना में 112 लाख मीट्रिक टन दाल एमएसपी पर खरीदी. आज दाल के किसान को भी ज्यादा पैसा मिल रहा है, दाल की कीमतें भी कम हुई हैं, जिससे गरीब को सीधा फायदा हुआ है. जो लोग किसानों को न एमएसपी दे सके, न एमएसपी पर ढंग से खरीद सके, वो एमएसपी पर किसानों को गुमराह कर रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि कृषि सुधारों से जुड़ा एक और झूठ फैलाया जा रहा है ये APMC यानि हमारी मंडियों को लेकर है. हमने कानून में क्या किया है? हमने कानून में किसानों को आजादी दी है, नया विकल्प दिया है. नए कानून में हमने सिर्फ इतना कहा है कि किसान चाहे मंडी में बेचे या फिर बाहर, ये उसकी मर्जी होगी. अब जहां किसान को लाभ मिलेगा, वहां वो अपनी उपज बेचेगा. नए कानून के बाद एक भी मंडी बंद नहीं हुई है. फिर क्यों ये झूठ फैलाया जा रहा है?

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए कृषि सुधारों को लेकर तीसरा बहुत बड़ा झूठ चल रहा है फार्मिंग एग्रीमेंट को लेकर. देश में फार्मिंग एग्रीमेंट क्या कोई नई चीज है? नहीं. हमारे देश में बरसों से फार्मिंग एग्रीमेंट की व्यवस्था चल रही है. उन्होंने कहा, “अभी किसी ने मुझे एक अखबार की रिपोर्ट भेजी 8 मार्च 2019 की. इसमें पंजाब की कांग्रेस सरकार, किसानों और एक मल्टीनेशनल कंपनी के बीच 800 करोड़ रुपए के फार्मिंग एग्रीमेंट का जश्न मना रही है. पंजाब के किसान की खेती में ज्यादा निवेश हो, ये हमारी सरकार के लिए खुशी की ही बात है.”

प्रधानमंत्री ने कहा, “प्राकृतिक आपदा आ जाए, तो भी किसान को पूरे पैसे मिलते हैं. नए कानूनों के अनुसार, अगर अचानक मुनाफा बढ़ जाता है, तो उस बढ़े हुए मुनाफे में भी किसान की हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई है. मेरी इस बातों के बाद भी, सरकार के इन प्रयासों के बाद भी, अगर किसी को कोई आशंका है तो हम सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर, बहुत ही विनम्रता के साथ, देश के किसान के हित में, उनकी चिंता का निराकरण करने के लिए, हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार हैं.”

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