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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्रामीणों को मिलेगा जमीन का मालिकाना हक |

हम आपको बता दें कोरोना का हाल के बाद शिवराज सरकार सबको खुशी का तोहफा देने जाने वाली है ग्रामीणों को मिलेगा जमीन का मालिकाना हक मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्रामीणों के लिए एक अच्छी खबर है. अब उन्हें गांव में बने अपने घर का मालिकाना हक (Owners Rights) मिलेगा. यानि अब उनकी जमीन उनके नाम होगी. ऐसा करने से ग्रामीणों को आसानी से बैंक से लोन मिल जाएगा. अभी जमीन पर मालिकाना हक नहीं होने की वजह से उन्हें किसी तरीके का जमीन से जुड़ा फायदा नहीं मिलता था. राजस्व मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत (Revenue Minister Govind Singh Rajput) ने बताया कि स्वामित्व योजना का शुभारंभ प्रदेश में 2 अक्टूबर से शुरू होगी. इस योजना में ग्रामीण क्षेत्रों के आबादी एरिया में निवासरत ऐसे लोग, जिनके पास कोई मालिकाना दस्तावेज नहीं है और न ही उनका राजस्व रिकॉर्ड में उल्लेख है.

ऐसे सभी को जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा. इसको लेकर मंत्री ने मंत्रालय में राजस्व विभाग की समीक्षा की है.

गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि यह योजना प्रदेश के 3 जिलों सीहोर, हरदा और डिंडोरी के 11-11 ग्रामों में प्रारंभ की जायेगी. इस योजना से गांव की संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा. आबादी क्षेत्र में निवासरत ग्रामीणों को उसकी भूमि का स्वामित्व प्राप्त होगा, जिससे बैंक से ऋण, संपत्ति बंटवारा एवं विक्रय करना सरल होगा. प्रथम चरण में मध्य प्रदेश के 10 जिलों में 10 हजार गांव का सर्वे का लक्ष्य रखा गया है.

15 करोड़ पुराने भू-अभिलेखों का होगा डिजिटाईजेशन राजस्व मंत्री ने बताया कि आमजन को भू-अभिलखों की नकल सहज उपलब्ध कराने एवं भूमि के संपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के उद्देश्य से अभिलेखों का डिजिटाईजेशन किया जा रहा है, जिससे खसरा, बी-1, अधिकार अभिलेख, मिसल-बंदोबस्त, निस्तार पत्रक, रि-नंबरिंग सूची और वाजिब उल अर्ज संबंधी अभिलेखों की नकल 24 घंटे ऑनलाइन पर उपलब्ध रहेंगी. इसमें लगभग 15 करोड़ पुराने अभिलेखों का डिजिटाईजेशन किया जाएगा. आगर- मालवा में डिजिटाईजेशन का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है.

कोर्स पद्वति से होगा सटीक सीमांकन
राजपूत ने बताया कि भूमि का सीमांकन किसानों की बड़ी समस्या रही है, जिसके कारण उनमें प्रायः विवाद की स्थिति बनती रहती है. भूमि को कोर्स पद्वति के द्वारा भूमि का सीमांकन सटीक एवं सरल हो जायेगा. इसमें लगभग 90 तहसीलों में नेटवर्क टॉवर लगाये जायेंगे. इस योजना के क्रियान्वयन से समय की बचत होगी, वहीं खराब मौसम एवं बोई हुई फसल के समय भी भूमि का सीमांकन किया जा सकेगा.

भूमि बंधक की प्रक्रिया होगी आसान
अभी तक किसानों को बैंक लोन के लिए कलेक्ट्रेट, पटवारी और बैंक आदि के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब शासन ने भूमि बंधक प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. इससे अब नागरिकों को बैंक में जाकर सिर्फ आवेदन करना होता है, शेष प्रक्रिया बैंक द्वारा ही की जाती है. इसी प्रकार राजस्व संग्रहण की दृष्टि से लैंड रेवेन्यू एकाउंटिंग सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे राजस्व आसानी से तथा पारदर्शी तरीके से संग्रहित किये जाते हैं.

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