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बीजेपी के सदस्यता अभियान में गहरा सियासत

भोपाल| हम आपको बता दें कि बीजेपी अपना सदस्यता अभियान चलाया जिसमें वह करीब 80000 से ज्यादा लोगों को इकट्ठा करके कांग्रेस से बीजेपी में शामिल करा चुकी है अब तक इस सदस्यता अभियान में बीजेपी के कई बड़े नेता शिवराज सिंह चौहान से लेकर नरोत्तम मिश्रा तक सब के सब लगे हुए हैं । मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी द्वारा ग्वालियर में आयोजित तीन दिवसीय सदस्यता अभियान ने राज्य की सियासत में गर्माहट ला दी है। भाजपा जहां 76 हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पार्टी में शामिल होने के दावे कर रही है, वहीं कांग्रेस की सदस्यता अभियान को फर्जी बता रही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने और राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लगभग पांच माह बाद ग्वालियर का तीन दिवसीय प्रवास हुआ। सिंधिया के इस दौरे को भाजपा ने सियासी तौर पर बड़ा संदेश देने की रणनीति बनाई थी।

भाजपा ने सिंधिया के तीन दिवसीय दौरे के दौरान सदस्यता अभियान का आयोजन किया

इस सदस्यता अभियान में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के चारों लोकसभा क्षेत्र ग्वालियर, गुना, भिंड और मुरैना के क्षेत्र के 76 हजार से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पार्टी में शामिल होने का दावा किया गया है। इस सदस्य संख्या से एक तरफ जहां कांग्रेस की चिंताएं बढ़ी हैं तो दूसरी ओर उसकी ओर से सवाल भी किए जा रहे हैं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने ग्वालियर चंबल क्षेत्र से 76 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं के भाजपा में शामिल होने का स्वागत करते हुए, आगामी समय में होने वाले उपचुनाव में भाजपा की बड़ी जीत का दावा किया है।

वहीं दूसरी ओर, कमलनाथ सरकार के पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने इस सदस्यता अभियान पर ही सवाल उठा दिए हैं और इसे फर्जी अभियान करा दिया है। उनका दावा है कि इस सदस्यता अभियान में कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता भाजपा में शामिल नहीं हुआ है, अगर कोई बड़ा नेता भाजपा में गया जो तो बताएं।

ग्वालियर-चंबल इलाके के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ली है, मगर जो संख्या बताई जा रही है, उसमें अंतर भी हो सकता है। इसमें कोई शक नहीं है कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सदस्यता लेने पूरे अंचल से ग्वालियर पहुंचे थे। भाजपा द्वारा बताई जा रही संख्या में अगर कहीं गड़बड़ी है तो इसका खुलासा कांग्रेस को ही करना होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसका सही परीक्षण तो कांग्रेस ही कर सकती है।

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