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भाजपा कार्यकारिणी में प्रदेशाध्यक्ष सांसद वीडी शर्मा ने पांच महामंत्रियों की घोषणा

जब से कांग्रेसी सरकार गिरी है तब से बीजेपी और कांग्रेस के बीच में तनातनी चल रही है बीजेपी को सत्ता तो मिल गई पर अब उनके आपस के कार्यकर्ता है और कुछ मंत्री भी आपस में ही लड़ रहे है इसका बड़ा कारण है कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए संध्या समर्थक क्योंकि उन्हें भी पार्टी में बड़े पद और मंत्रिमंडल में जगह देने का दबाव बना हुआ है ।लेकिन यह अंतर नहीं बात है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पदाधिकारियों की घोषणा बाद में चाहते थे, परंतु अपनी टीम खड़ी कर वीडी नया संदेश देना चाहते थे।

इस प्रयोग से शिवराज व सिंधिया की भी बात रह गई और वीडी की भी जय-जय हो गई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मंगलवार को पितृपक्ष शुरू होने से पहले अपनी कार्यकारिणी में पांच महामंत्रियों की घोषणा की, लेकिन उपाध्यक्ष, मंत्री और कोषाध्यक्ष के पदों पर नए नाम घोषित नहीं हुए।

इस अधूरी कार्यकारिणी से भाजपा कार्यकर्ता भी अचरज में हैं। हालांकि कार्यकारिणी में शामिल होने के लिए जिस तरह का दबाव चल रहा था, उसे देखते हुए यह बहुत अस्वाभाविक नहीं लग रहा है।

एक तरफ वीडी शर्मा जल्द से जल्द कार्यकारिणी घोषित करने का दावा कर रहे थे, जबकि दूसरी तरफ उन पर बड़े नेताओं के समर्थकों के अलावा सिंधिया के साथ आए कांग्रेस के बागियों को भी अवसर देने का दबाव था। वीडी ने इन चुनौतियों के बीच चार की जगह पांच महामंत्रियों का चयन कर यह भी संदेश दे दिया कि युवाओं को वह आगे ला रहे हैं।

उन्होंने महिला नेत्री को महामंत्री बनाने के साथ ही जातीय और भौगोलिक ढांचे पर भी संतुलन बनाया। ब्राह्मण अध्यक्ष होने के बावजूद ब्राह्मण महामंत्री बनाकर उन्होंने इस वर्ग को साधने की पार्टी की रणनीति को महत्व दिया तो ओबीसी, अजा और अल्पसंख्यक का भी संतुलन बनाया।

वीडी ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी रणवीर सिंह रावत, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की करीबी कविता पाटीदार और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती के समर्थक भगवान दास सबनानी को मौका देकर शिवराज और सिंधिया के मुकाबले एक नई लकीर भी खींचने की कोशिश की है।

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