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मध्य प्रदेश कांग्रेस टुट की कगार पर, कमलनाथ नही

मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव में हार के साथ ही कांग्रेस में बगावत के बिगुल बज गया है। अभी मुखर विरोध नहीं हुआ है, लेकिन बगावती तेवरों की शुस्र्आत हो गई है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अस्र्ण यादव के बयान से इसे समझा जा सकता है। पार्टी में अब बुजुर्ग पीढ़ी की जगह युवा नेतृत्व को संगठन की कमान सौंपने का दबाव बढ़ेगा। Bihar Sanskrit Board Patna

नतीजों को लेकर यादव ने कहा कि उपचुनाव में बिकाऊ नहीं, टिकाऊ चाहिए का कांग्रेस का नारा काम नहीं आया। जो सीटें हाथ से निकली हैं, वहां नए सिरे से मेहनत की जाएगी। यह भी उल्लेखनीय है कि यादव भोपाल में ही थे, लेकिन वे प्रदेश कार्यालय नहीं गए।

मालूम हो, उपचुनाव के प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इमरती देवी को लेकर जो अपशब्द कहे थे, उसे पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए बयान से असहमति जताई थी।

इसके बाद भी कमल नाथ अपने खेद जताने वाले बयान पर कायम रहे और उन्होंने माफी नहीं मांगी। इससे यह संकेत गया कि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व राहुल की बात को दरकिनार कर अपनी मर्जी से काम कर रहा है। कमल नाथ के बयान पर बवाल मचने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा का मध्य प्रदेश दौरा पार्टी ने रद कर दिया था। अब माना जा रहा है कि पार्टी राहुल की लाइन पर आगे बढ़ेगी और युवाओं को संगठन की कमान सौंपी जा सकती है।

इनका कहना है

कांग्रेस कमल नाथ जी के नेतृत्व में एकजुटता से उपचुनाव लड़ी थी और एकजुटता से आने वाले समय में भाजपा को जनता के हित में काम करने के लिए मजबूर करेगी। पार्टी के अंदर न कोई बगावत है और न ही आपसी नाराजगी है।

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