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क्या शिवराज मामा बचा पायेंगे सरकार? क्या फिर हिन्दू करेंगे कांग्रेस पर बरोसा?

3 नवंबर 2020 को मध्य प्रदेश में विधानसभा की 28 सीटों के लिए उपचुनाव हो रहा है और उसका परिणाम 10 नवंबर को घोषित होगा। भारत के इतिहास में शायद पहली बार किसी राज्य में एकसाथ विधानसभा की 28 सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं। ये उपचुनाव मध्य प्रदेश की सरकार का भविष्य तय करेगा यानि शिवराज की सरकार बनी रहेगी या कमलनाथ की वापसी होगी। इसीलिए वाजिब सवाल उठता है कि क्या मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान अपनी सरकार बचा पाएंगे?

इस सवाल को समझने के लिए 4 सवालों को जानना बहुत जरूरी है

पहला सवाल, ये उपचुनाव क्यों हो रहे हैं ?

2018 में मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी थी लेकिन कमलनाथ की सरकार 18 महीने में ही गिर गई और कांग्रेसी सरकार के पतन का कारण बने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया जिन्होंने मार्च 2020 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और 22 कांग्रेसी विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

स्वाभाविक था कमलनाथ सरकार सत्ता से बाहर हो गई और सत्तासीन हुए भाजपा के शिवराज सिंह चौहान। कांग्रेस का बिखराव 22 तक ही नहीं रुका बल्कि पार्टी छोड़ने वालों की संख्या पहुंच गई 25 पर और तो और उपचुनाव घोषणा के बाद भी 1 कांग्रेस विधायक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अर्थात कांग्रेस के 26 विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। लेकिन अभी उपचुनाव हो रहे हैं 28 सीटों पर जिसमें 25 सीट कांग्रेस की थीं और 3 विधायकों की मृत्यु हो चुकी है। इसीलिए ये उपचुनाव हो रहे हैं।

दूसरा सवाल, मध्य प्रदेश की सरकार का भविष्य इन उपचुनावों से क्यों और कैसे जुड़ा है ?

इस सवाल को समझने के लिए पहले देखते हैं मध्य प्रदेश विधान सभा का पार्टी पोजीशन

मध्यप्रदेशविधानसभापार्टीसीटभाजपा107कांग्रेस87बीएसपी02एसपी01निर्दलीय04रिक्त29कुल230

मध्य प्रदेश में सत्ता में बने रहने के लिए 116 सीट चाहिए। स्वाभाविक है कि यहां भाजपा का दावा मजबूत है यानि भाजपा की शिवराज सिंह चौहान की सरकार जिसे फिलहाल विधान सभा में 107 सीट है यानि सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा को चाहिए सिर्फ 9 सीट। यानि भाजपा को उपचुनाव हो रहे 28 सीटों में से 9 सीट चाहिए।

दूसरी तरफ है कांग्रेस, जिसके पास विधानसभा में कांग्रेस के पास सिर्फ 87 सीटें हैं यानि कांग्रेस को 28 में से 28 सीट जीतनी होंगी तब संख्या बनेगी 115 की फिर भी 1 सीट और चाहिए होगी। हां ऐसी स्थिति में कांग्रेस सहायता मांग सकती है बीएसपी, एसपी या निर्दलीय से जिनकी संख्या क्रमशः 2, 1 और 4 है यानि इन तीनों को मिलाकर 7 की संख्या बनती है। क्या कांग्रेस 28 में से 28 सीट जीतेगी?

कांग्रेस के लिए दूसरा संभावना देखते हैं कि यदि कांग्रेस की संख्या में इस 3 पार्टियों की संख्या 7 को भी जोड़ दें तो कुल संख्या बनती है 87+7 = 94 यानि इस स्थिति में भी कांग्रेस को 28 में से 22 सीटों को जितना होगा। फिर से वही सवाल क्या कांग्रेस 28 में से 22 सीट जीतेगी?

तीसरा सवाल, क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ताकत का प्रमाण दे पाएंगे?

आज की तारीख में सिंधिया के लिए नंबर वन एनिमी है कांग्रेस और कमलनाथ। येन केन प्रकारेण सिंधिया इस उपचुनाव में कांग्रेस और कमलनाथ को मिट्टीपालित करना चाहते हैं जिसके लिए सिंधिया ने ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में अपनी पूरी ताकत लगा दी है क्योंकि सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले 22 विधायकों में से 16 विधायक इसी क्षेत्र से आते हैं और ये क्षेत्र सिंधिया परिवार का गृह क्षेत्र है जिसे सिंधिया का गढ़ माना जाता है। सिंधिया के लिए यह एक अग्नि परीक्षा ही है जिसमें उन्हें अपनी ताकत को इजहार करने मौका मिला है और यही ताकत उन्हें भाजपा एक खास स्थान दिलाएगा।

आखिरी सवाल, क्या कांग्रेस, शिवराज, संघ और सिंधिया को परास्त कर पाएगी?

कांग्रेस के सामने इन तीनों को एक साथ परास्त करना एक माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के बराबर जैसी चुनौती है। क्या कांग्रेस इस बड़ी चुनौती को स्वीकार कर पाएगी या नहीं कर पाएगी? इसका उत्तर फिलहाल किसी के पास नहीं है बल्कि भविष्य के गर्भ में छिपा है।

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