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शिवराज सिंह चौहान और सिंधिया ने एक नई चाल चली

मध्य प्रदेश में उपचुनाव होने इससे पहले ही कांग्रेस बीजेपी आमने सामने आ चुकी है हम आपको एक चीज और बताना चाहते हैं 2018 में बीजेपी को करारी हार मिली थी ग्वालियर चंबल क्षेत्र से अब इसकी कमी पूरी करने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने एक नई चाल चली है जिसमें उन्होंने जातीय समीकरण बिठाने की पूरी तरह कोशिश की है. क्योंकि दलित और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर 2018 के चुना में बीजेपी को करारी हार मिली थी. बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर के जरिए दलित वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है.

शिवराज सिंह चौहान और सिंधिया ने एक नई चाल चली

दलित वोट बैंक पर बीजेपी की नजर
बीजेपी दलितों को अपनी ओर खींचने के लिए विधानसभा स्तर पर दलित समाज के प्रमुख लोगों के साथ बैठक आयोजित कर रही है और उन्हें यह बताया जा रहा है कि 2 अप्रैल की हिंसा के बाद किस तरीके से बीजेपी ने एससी एसटी एक्ट में संशोधन किया.

वहीं दूसरी ओर पिछड़ा वर्ग वोटर्स के लिए मंत्री रामखेलावन पटेल को ग्वालियर चंबल संभाग के रण में उतारा है, वह यह बता रहे हैं कि जिस तरीके से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक शक्तियां दी उसके बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एमपी में भी पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक शक्तियां प्रदान की है, इसके माध्यम से अब पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए बेहतर काम हो सकेगा.

पिछड़ा वर्ग को साथ लाने की कोशिश
मंत्री रामखेलावन पटेल जनता के बीच जाकर कांग्रेस की खामियां भी गिनवा रहे हैं. वे बता रहे हैं कि किस तरीके से हाईकोर्ट में लंबित पिछड़ा वर्ग आरक्षण प्रकरण में कांग्रेस ने मजबूती से पक्ष नहीं रखा जिसके चलते पिछड़ा वर्ग को बड़े हुए आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है. मंत्री रामखेलावन पटेल का कहना है कि वैसे तो मुख्यमंत्री सर्वहारा वर्ग के लिए काम करते हैं लेकिन जिस तरीके से पिछड़ा वर्ग के लोगों को विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था उसके लिए अब आयोग का गठन कर दिया गया है

आपको बता दें कि ग्वालियर चंबल संभाग में जिन 16 सीटों पर उपचुनाव होने हैं उनमें से 6 सीटें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं और 2 सीटें पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित हैं और इन सभी सीटों पर 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, ऐसे में बीजेपी कतई नहीं चाहती है कि एक बार फिर मतदाता कांग्रेस के साथ जाए, इसीलिए उन्हें साधने की कोशिश की जा रही है.

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